🤲 ANJUMAN-E-ZULFEQARE HAIDERI-MAHOLI
🕊️ सुनसान बन वो रात, वो उठता हुआ धुआँ
निकली पदर को ढूँढ़ने नन्हीं सी एक जाँ
कहती थी — "बाबा जान, बता दो के हो कहाँ?"
एक लाश बोल उठी — "मेरी बेटी, मैं हूँ यहाँ!
लेकर इसी सदा का सहारा पहुँच गई
रोती हुई नशेब में दुखिया पहुँच गई" 🕊️
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
मक़तल में लाश बाप की जब सर कटी मिली
थी उम्र चार साल की बच्ची तड़प गई
बेटी जब अपने बाप को पहचान न सकी
आवाज़ — "या अब्बा!" की सकीना ने रो के दी
लाशे ग़रीब बाप का बोला नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में
लिखा है रावियों ने वो मंज़र बड़ा अजीब
जंगल, वो काली रात, वो ग़ुरबत, वो ग़म-नसीब
आवाज़ सुन के बाप की पहुँची है जब क़रीब
हालत पिदर की देख के रोई बहुत ग़रीब
बेटी के साथ बाप भी रोया नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में
आगे बढ़ी हुसैन की मज़लूम ग़मज़दा
तीरों से जिस्म बाप का देखा भरा हुआ
घबरा के तीर जिस्म से करने लगी जुदा
कमसिन थी, कोई तीर न उस से निकल सका
पाया न जब हुसैन का सीना नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में
ख़ाली न पाई जिस्म पे तीरों से कोई जा
करने लगी तवाफ़ वो बाबा की लाश का
मायूस हो के पैंती बैठी वो ग़मज़दा
रुख़सार अपने बाप के तलवों पे रख दिया
लेकर पिदर के पाँव का बोसा नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में
अपने पिदर की लाश पे ले ले के सिस्कियाँ
वो अपने दर्द बाप से करने लगी बयाँ
रुख़ पर बनी थी साफ़ जो ज़ालिम की उंगलियाँ
बच्ची ने जब दिखाए तमाचों के वो निशान
ज़ख़्मी बदन हुसैन का तड़पा नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में
फिर ये कहने लगी रो रो के — "यतीमा बाबा,
मेरे बालों को सितमगर ने जो पकड़ा बाबा
मारा ज़ालिम ने मुझे ऐसा तमाचा बाबा
छा गया मेरी निगाहों में अंधेरा बाबा!"
कहती थी — "मैं यतीम हूँ, मुझ पर न वार कर
की मिन्नतें बहुत की, ज़रा इंतज़ार कर
मैं दे रही थी शिम्र को बुंदे उतार कर
छीनें हैं बे-रहम ने मगर मुझको मार कर!"
ये दर्द जब पिदर को सुनाया नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में
लाशे शह-ए-ज़माँ से वो जिस दम जुदा हुई
लगता था अब जिएगी न बच्ची हुसैन की
जाने लगी नशेब से जब शह की लाडली
बाबा को अपने छोड़ के तन्हा नशेब में
रोई बहुत यतीम सकीना नशेब में
बेसर जब अपने बाप को देखा नशेब में