🤲 ANJUMAN-E-ZULFEQARE HAIDERI-MAHOLI
🕊️ आये जो क़बरे फातेमा पे सय्यदे अनाम 🕊️
सहरा में दिल के टुकड़ों की बस्ती बसाऊंगा
अम्मा मदीना लौट के मैं आ न पाऊंगा
कंपा फ़लक लरज़ने लगी क़ब्रे सय्यदा
आई जनाबे फ़ातेमा की क़ब्र से सदा
जाओ मेरे लाल….
तुम पे हर कदम रहे दुआ मेरी, और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जा रहे हो तुम जो कहके दीने हक़ बचाऊंगा
अम्मा आप की क़सम मैं खून में नहाऊंगा
अब हो जो भी हाल तुम हो पायमाल
तुम पे हर कदम रहे दुआ मेरी और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जाओ मेरे लाल...
बचपने में जो किया था वादा बाबा जान से
वक़्त अब वो आ गया कफ़न तू सर से बांध ले
देख मेरे लाल दीं का है सवाल
कामियाबियां हैं तेरे साथ ही और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जाओ मेरे लाल...
चाहिए ख़ुदा-के दीन को अगर अमां
दो रिदाए ज़ैनबे हज़ीं का साएबां
जाओ अब शिताब इब्ने बूतुराब
है तुम्हारे साथ बाबा जान भी, और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जाओ मेरे लाल...
दे रहा है दीने किब्रिया तुम्हें सदा
अल-मदद हुसैन अल-मदद शहे हुदा
बे वतन हुसैन मेरे दिल के चैन
हम सफ़र तुम्हारे साथ माँ हुई और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जाओ मेरे लाल...
शाने बावफ़ा के होंगे जिस घड़ी क़लम
रोयेंगे अलम के साये में तेरे हरम
रोएगी वफ़ा और कर्बला रोयेगी फ़ुरात और तश्नगी, और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जाओ मेरे लाल...
अकबरे जवां जिगर पे खाएगा सिना
मां कहेगी मेरा चांद खो गया कहां
उसपे नौहा ख़्वां होंगे मेरी जां
मै भी और हसन भी और रसूल भी, और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जाओ मेरे लाल...
सुनके रो दिये हुसैन मुस्तफा की आल भी
जाओ मेरे लाल, जाओ मेरे लाल
तुमपे हर कदम रहे दुआ मेरी, और साया-ए-ख़ुदा-ए-ज़ुलजलाल
जाओ मेरे लाल...