🤲 ANJUMAN-E-ZULFEQARE HAIDERI-MAHOLI
🕊️ दरे ज़िन्दान पर कोई मासूमा 🕊️
पढ़ा करती है ये रोकर नौहा..
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
बहुत डर मुझको यहां लगता है
बहुत तन्हा हूं चले आओ ना
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
ख़ुद आके देख लो बाबा मेरी हालत
नहीं पहचान पाओगे मेरी सूरत ×2
सहे बचपन में मसायब इतने
ज़ईफ़ा दिखने लगी ये दुखिया..
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
बड़ा दुश्वार है इस क़ैद में जीना
बहुत याद आ रहा है आप का सीना ×2
गए हो जबसे नहीं सोई मैं
सुकून से अब तक कभी एक लम्हा
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
मुझे फिर क़ब्र में लगने लगा है डर
निकाला था जिन्होंने लाशा-ए-असग़र ×2
वो ज़ालिम फिर से पलट आए हैं
फुफी और मैं हूं यहां पर तन्हा..
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
मैं रोऊं लेके कब तक सिसकियां बाबा
बहुत दुखती हैं मेरी पसलियां बाबा ×2
सकीना इस दम है किस हालत में
फ़क़त समझेंगी ये दादी ज़हरा
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
नज़र आता नहीं आंखों को मलती हूं
सहारा लेकर दीवारों का चलती हूं ×2
पकड़ कर ज़ुल्फ़ें मुझे ज़ालिम ने
ना जाने कैसा तमाचा मारा
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
लगे हैं ज़ख़्म जितने सब दिखाऊंगी
जब आओगे तो मैं सब कुछ बताऊंगी ×2
बहुत मारा है, बहुत तड़पाया
मुझे लोगों ने समझ कर तन्हा
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
सकीना जिस घड़ी पढ़ती थी ये नौहा ×2
मुझे लगता है कि अब घुट घुट कर
निकल जाएगा यहीं दम मेरा..
बाबा बाबा बाबा बाबा.. ×2
दरे ज़िन्दान पर कोई मासूमा
पर्दा करती है ये रोकर नौहा..