Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar

Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar

Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar Noha ek aisi adabi aur jazbaati riwayat hai jo Islam ki azadari ka aham hissa hai. Iska m...

Monday, July 21, 2025

तबूक की जंग



तबूक की जंग इस्लामी तारीख़ की वो अहम मुहिम थी जिसमें रसूल-ए-अकरम (स.अ.व.) ने इस्लाम की ताक़त दिखाने के लिए शामी हुकूमत के खिलाफ एक बड़ी फौजी तैयारी की। ये जंग रोम के बादशाह हरकुल (Heraclius) से होने वाली थी, जिसने अरब में इस्लाम की बढ़ती ताक़त को देख कर मुसलमानों पर हमला करने की योजना बनाई थी।

🌙 हज़रत अली (अ.स.) को मदीना में छोड़ना

जब रसूल (स.अ.व.) तबूक की तरफ रवाना हुए तो हज़रत अली (अ.स.) को मदीना का नायब बनाकर छोड़ गए। कुछ मुनाफिक़ों ने ये अफ़वाह फैलाई कि रसूल (स.अ.व.) अली (अ.स.) से नाराज़ हैं। इस पर रसूल ने फरमाया:

"या अली, तुम मेरे लिए ऐसे हो जैसे मूसा के लिए हारून थे, बस नबूवत के बग़ैर।"

ये हदीस-ए-मंस़िलत (Hadith al-Manzilah) शिया नजरिए से इमाम अली (अ.स.) की खिलाफ़त की तस्दीक़ है।

⚔ मुनाफ़िक़ों की साज़िशें

तबूक के मौके पर कई मुनाफिक़ बहाने बनाकर जंग में शामिल नहीं हुए। कुछ ने मस्जिद-ए-ज़रार बनाई जो इस्लाम को नुक़सान पहुंचाने की साज़िश का हिस्सा थी। रसूल (स.अ.व.) ने लौटते ही इसे ढहाने का हुक्म दिया।

🕊 जंग हुई क्यों नहीं?

जब मुसलमान तबूक पहुंचे तो रोमी फौज (हरकुल की फौज) ने डर के मारे मुकाबला ही नहीं किया। यूं ये जंग बिना लड़े ही खत्म हो गई। मगर इस मुहिम ने इस्लामी की ताकत दूर-दूर तक फैला दी।

📌 शिया नज़रिया – तबूक का सबक

  • हज़रत अली (अ.स.) को मदीना में छोड़ना उनकी इमामत
  • मुनाफ़िक़ों की असलियत और उनके चेहरों से नकाब हट गई।
  • इस्लाम की ताक़त रोमी बादशाह हरकुल को भी पीछे हटने पर मजबूर कर गई।

तबूक की मुहिम ने सिर्फ दुश्मनों को खामोश नहीं किया, बल्कि अहले बैत (अ.स.) के मक़ाम को भी उजागर कर दिया।