Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar

Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar

Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar Noha ek aisi adabi aur jazbaati riwayat hai jo Islam ki azadari ka aham hissa hai. Iska m...

Tuesday, July 22, 2025

उक़्बा की पहाड़ी पर साज़िश – रसूल ﷺ को मारने की मुनाफ़िक़ों की नाकाम कोशिश


उक़्बा की पहाड़ी पर साज़िश – रसूल ﷺ को शहीद करने की नाकाम कोशिश

रसूल-ए-अक़्दस हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ जब ग़ज़वा-ए-तबूक से वापस मदीना लौट रहे थे, तो रास्ते में एक ऐसी साज़िश हुई जो तारीख़-ए-इस्लाम का काला बाब है। इस साज़िश का मक़सद रसूल ﷺ को जान से मार देना था, और ये साज़िश वादी-ए-उक़्बा की पहाड़ी पर की गई थी।

ग़ज़वा-ए-तबूक के बाद का सफ़र

ये वाक़िया उस वक़्त का है जब रसूल ﷺ ने रूमी हुकूमत के साथ टकराव के लिए तबूक का सफ़र किया। जब रसूल ﷺ मदीना की तरफ़ वापस आ रहे थे, तो उन्होंने कुछ लोगों से अलग होकर एक तंग और ख़तरनाक रास्ता चुना, जिसे उक़्बा कहा जाता था।

साज़िश की तफ़्सील

कुछ मुनाफ़िक़ों ने प्लान बनाया कि जब रसूल ﷺ इस तंग दर्रे से गुज़रें, तो उनके ऊँट को डराकर गिरा दिया जाए ताकि उन्हें नुकसान पहुँचे या उन्हें शहीद कर दिया जाए। इन मुनाफ़िक़ों ने अपने चेहरे नक़ाब से ढाँक रखे थे ताकि पहचाने ना जा सकें।

मलाकी इत्तिला और हुज़ैफ़ा का किरदार

शियों की रिवायत के मुताबिक़, हज़रत जिब्राईल अ.स. ने रसूल ﷺ को इस साज़िश से आगाह किया। रसूल ने फ़ौरन हुज़ैफ़ा बिन यमान और अम्मार बिन यासिर को हुक्म दिया कि वो पीछे जाकर निगरानी करें। दोनों ने जाकर देखा कि वाक़ई कुछ नक़ाबपोश लोग हमला करने की फिराक़ में हैं। उन्होंने उन पर ललकारा और तलवारें निकाल लीं। हमलावर डरकर भाग गए।

मुनाफ़िक़ीन के नाम और हुज़ैफ़ा का सुकूत

इस वाक़ये के बाद, रसूल ﷺ ने उन मुनाफ़िक़ों के नाम हुज़ैफ़ा को बता दिए और कहा कि ये राज़ महफ़ूज़ रखो। शियों की किताबों के मुताबिक़, इन मुनाफ़िक़ों में कुछ नाम वो भी थे जो बाद में खलीफ़ा बने। यही वजह है कि हुज़ैफ़ा ने अपनी ज़िंदगी भर ये नाम आम लोगों को नहीं बताए, लेकिन मौला अली अ.स. को बताया था।

शिया रवायत और मक़ाम-ए-विलायत

शियों के नज़दीक, ये वाक़या रसूल ﷺ की वफात से पहले की सबसे बड़ी साज़िशों में से एक थी, और इसका मक़सद सिर्फ़ नबी की जान लेना ही नहीं, बल्कि मक़ाम-ए-विलायत और हक़ की इमामत के रास्ते में रुकावट डालना था। अगर रसूल उस दिन शहीद हो जाते, तो न इमामत का सिलसिला ज़िंदा रहता और न इस्लाम की रूह बाक़ी रहती।

सबक़:

उक़्बा की पहाड़ी का वाक़या इस बात का सुबूत है कि नबी ﷺ की ज़ात को सिर्फ़ बाहर के दुश्मनों से नहीं, बल्कि अंदर के मुनाफ़िक़ों से भी ख़तरा था। लेकिन अल्लाह ने अपने नबी की हिफाज़त की और हक़ का परचम बुलंद रखा।