Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar

Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar

Noha Lyrics ka Maqsad aur Iska Asar Noha ek aisi adabi aur jazbaati riwayat hai jo Islam ki azadari ka aham hissa hai. Iska m...

Monday, August 26, 2019

shabihe imame zama

शबीहे इमामे-ज़मा खैंचते हैं
तसव्वुर में तस्वीरे जां खैंचते हैं

ज़मीदार  सैराब हैं करबला के
अज़ीयत इमामे-ज़मा खैंचते हैं

जगह मोल ली है मज़ारों की खातिर
ज़मीं पे शहे दीं निशां खैंचते हैं

इधर ख़ुश्क  है फातेमा की ज़राअत
वो खेतों  में आबे रवां खैंचते हैं

हवा लगने देती न थी जिस को बुलबुल
वही गुल जाफाए-खिज़ां खैंचते हैं

कहाँ बेड़ियां और कहाँ पा ए आबिद
ये लंगर कहीं नतावां खैंचते हैं

अजब हाल  है दुखतरे फातेमा का
रिदा सर से इज़ा-रवां खैंचते हैं

पुकारी सकीना दुहाई है बाबा
सितमगर मेरी बालियां खैंचते हैं

कटी जाती हैं गर्दने बीबियों की
रसन को जो इज़ा-रवां खैंचते हैं

ये आलम है फुरक़त में कहती थीं ज़हरा
केे रग रग से जिस तरह जां खैंचते हैं

कहा शाह ने “हुशियार ए क़ौमे नारी”
हम अब तेग़े  आतिश-फिशा खैंचते हैं

क़लम यूँ ही कागज़ पे थम थम केे चलता
क़दम जिस तरह नातवां खैंचते हैं

बहुत बाग़ दुनिया केे कंटों से उलझे
बस अब रख्स सूए जिनां खैंचते हैं

क़दम बेड़ियों में, हैं रस्सी में बाज़ू
ये दुःख आबिदे नतावां खैंचते हैं

कहा रो केे अकबर ने ऐ दर्द थम जा
कि सीने से बाबा  सिना खैंचते हैं

बहुत हम को पीसा है, इक दिन तुझे भी
शिकंजे में ऐ आसमां खैंचते हैं

मोहब्बत का रिश्ता निहायत है नाज़ुक
मुझे  किस लिए क़दरदां खैंचते हैं

क़रीं सर के है आफतबे-क़यामत
लहद पर अबस साएबां खैंचते हैं

दिखा दो ज़मीने नजफ की बुलंदी
बहुत आप को आसमां खैंचते हैं

नस ए ग़म की शिद्दत से कहते थे आबिद
अजब सख़्तियां इस्ताख़्वां खैंचते हैं

ज़मीं के तले जिन को जाना है इक दिन
वो यूं सर को ता आसमां खैंचते हैं

फ़क़ीरों ने यां पांव फैला दिए हैं
अजब हाथ अहले जफा खैंचते हैं

अबस है उदूं दर पे ए क़त्ले असगर
ये ईज़ा कहीं बे ज़बां खैंचते हैं

वो हैं पहलवां हम जो कुव्वत दिखाएं
फलक पर सिपर कहकशां खैंचते हैं

सुख़न है अगर बाइसे तुल्ख़ कामी
तो हम आप अपनी ज़बा  खैंचते हैं

‘अनीस’ इस ज़मीं में बहुत कम है वुसअत
कुमैते क़लम की इनां खैंचते हैं